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My first blog in the name of 70th independence

 My first blog in the name of 70th independence Even after 70 years of independence, big corrupt individuals roam freely both within the country and abroad, enjoying ill-gotten wealth, who should have been jailed by now. All the black money should have been confiscated, the country's debt eliminated, and poverty and the BPL (Below Poverty Line) stigma eradicated to accelerate real development. Without this, neither the country's debt nor poverty and hunger will be resolved because the misuse of black money continues to puncture the wheels of the nation's progress repeatedly. This way, the country will never catch up with the pace of development, nor will it ever regain its status as the "Golden Bird" under the discriminatory governance of Congress and BJP. The kind of tribal mindset that the government has in this agrarian country ensures that wealthy individuals receive massive tax waivers and exemptions equivalent to the budget of a small state, without even li...

🔥 सत्य का प्रहार: मोहनदास से महात्मा तक – धोखे का आवरण! 🔥

  🔥 सत्य का प्रहार: मोहनदास से महात्मा तक – धोखे का आवरण! 🔥 गांधी की मूर्ति हमेशा धोती में क्यों बनती है, जब उनकी आधी ज़िंदगी सूट बूट में ही कटी है ? ऐसा लगता है कि सूट बूट पहने गांधी को देखकर उनके तीन बंदर भी उन्हें पहचानने से इनकार कर देंगे! स्रोतों के अनुसार, गांधी ने ग्रामीण धोती जीवन तब अपनाया जब सूट बूट पहने गोरों ने उन्हें लात मारकर रेल से नीचे फेंक दिया । इस अपमान के बाद ही उन्होंने विदेशी बहिष्कार का आंदोलन शुरू किया, एक ऐसा विचार जिसके बारे में उन्होंने अपनी आधी ज़िंदगी सूट बूट पहनकर कभी सोचा भी नहीं होगा। 1. मनुवादी DNA: शोषण का इतिहास गोरों से भी पुराना! गांधी उस उच्च जाति से आते थे, जिसका गुलाम बनाकर भेदभाव करने का इतिहास गोरों से भी ज्यादा पुराना और लंबा रहा है! मनुस्मृति ने शोषण की कैसी हदों को पार किया, इसे देखिए: • यदि निच जाति वेद ज्ञान बोले तो उसकी जीभ काट दी जाएगी ! • यदि वह सुने तो कानों में गर्म पिघला लोहा डाल दिया जाएगा ! • गुलामों को कमर में झाड़ू टांगकर चलना पड़ता था, ताकि उनके चलने से आई अशुद्धीकरण साफ हो जाय ! • उन्हें गले में थूक हांडी टांग...

EconomicFreedomदेश के मूल निवासियों की पहचान और समृद्धि का मार्ग

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देश के मूल निवासियों की पहचान और समृद्धि का मार्ग 1. मूल पहचान और डीएनए का महत्व: स्रोतों के अनुसार, इस देश के मूलवासी (Mulvasi) यहाँ के असली मालिक हैं, जिनका डीएनए इस मिट्टी (फादर इंडिया और मदर इंडिया) से गहराई से जुड़ा है,। स्रोतों में यह तर्क दिया गया है कि देश की नारी 100% 'मदर इंडिया' के डीएनए का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि बाहर से आने वाले पुरुषों के समूहों ने यहाँ की नारी के माध्यम से ही अपने वंश को आगे बढ़ाया है। 2. गरीबी और भुखमरी का संकट: आज देश में सबसे अधिक गरीबी और भुखमरी की मार मूलवासी ही झेल रहे हैं,। स्रोतों में चिंता जताई गई है कि जहाँ विदेशी मूल के लोग अमीर होते जा रहे हैं, वहीं देश की खनिज संपदा के असली मालिक (मूलवासी) और अधिक गरीब होते जा रहे हैं। यह स्थिति 'सोने की चिड़िया' कहे जाने वाले देश के लिए एक गंभीर विषय है। 3. राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की आवश्यकता: • सत्ता की चाबी: स्रोतों का सुझाव है कि देश के 90% प्रमुख सरकारी पदों और सत्ता की स्टेरिंग पर मूलवासियों का नियंत्रण होना चाहिए ताकि देश को 'हाईजेक' होने से बचाया जा सके। • पार्ट...

Breaking News: अमेरिका में भूचाल!

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  Breaking News: अमेरिका में भूचाल! ‘Epstein Files’ का काला सच सामने आना शुरू — क्या भारत के रसूखदार भी घेरे में आएँगे? 📰 ब्लॉग की सामग्री (Body Text) 20 दिसंबर 2025 | खोज (Khoj) विशेष रिपोर्ट आज पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) पर टिकी हुई हैं। कल रात जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज़ सार्वजनिक किए गए, जिन्हें अब “ Epstein Files ” कहा जा रहा है। ये फाइलें सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं हैं— बल्कि यह उस आधुनिक गुलामी, यौन शोषण और सत्ता के दुरुपयोग का दस्तावेज़ हैं, जिसने दशकों तक दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों को कानून से ऊपर बनाए रखा। 🔍 अब तक खुलासों में क्या सामने आया? 1️⃣ दशकों का दबा हुआ सच इन दस्तावेज़ों में दुनिया के कई अमीर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े संपर्क, यात्राएँ और तस्वीरें दर्ज हैं। कुछ नाम पहले से चर्चित रहे हैं, तो कई ऐसे हैं जिन पर अब सवाल उठने शुरू हुए हैं। 2️⃣ ‘काली स्याही’ का खेल (Redaction) कई अहम पन्नों पर नाम और जानकारियाँ अभी भी काली स्याही से ढकी हुई हैं। अमेरिका में विपक्ष और मानव...

The chains of slavery

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 The chains of slavery The chains of slavery The dignity of those who were sent by America in chains is visible, but not the chains of slavery that have bound this country for thousands of years by the Manuists. Because such people are blinded by the Manuists due to excessive infection, they cannot see the humiliation of this country being enslaved by the Manuists, who have been occupying the four main pillars of democracy by considering themselves superior by birth, and who have been insulting it. Those people who spend millions of rupees to go to America and see a dignified and free America, and who see complete freedom and dignity in the 5 kg of government ration in the country, and not the slavery. Can such blind people not see the slavery of this country, who never discuss why the Manuists have kept this country in chains of slavery till now? When will the humanity to give freedom come in those people like the whites, accepting that enslaving a country and calling its indigeno...

गोरो की गुलामी में भी दलित अंबेडकर ने देश विदेश में उच्च शिक्षा की कई डिग्री प्राप्त किया था

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गोरो की गुलामी में भी दलित अंबेडकर ने देश विदेश में उच्च शिक्षा की कई डिग्री प्राप्त किया था  रतन लाल को क्या अंबेडकर से ज्यादे उच्च शिक्षा लेने का मौका मिला है, जो अपने भाषण में यह साबित करने की कोशिष कर रहा है कि गोरो से यह देश आजाद होने के बाद कांग्रेस सत्ता में सब मुलनिवासि अब देश विदेश में उच्च शिक्षा लेते हुए पढ़ लिख रहा हैं। जबकि मुल रुप से कांग्रेस सत्ता से ही दरसल मनुवादियों का गुलाम रामराज कायम हो गया है। जिस गुलाम रामराज में जो भी मुलनिवासि पढ़ लिख रहा है सब कांग्रेस अथवा मनुवादियों की देन नही बल्कि स्कूल कॉलेज वगैरा की देन है, जो की गोरो की गुलामी के समय में भी मौजुद थे। जिसे कांग्रेस की देन साबित करने की कोशिष करते हुए रतनलाल चमचा चमचा जो रटा मार रहा है, असल में वह खुद कांग्रेस का चमचा बनकर जीवन जिने का उस रास्ता को अपना लिया है, जिसे जब यह देश मनुवादियों से पुरी तरह से आजाद होगा तो ऐसे चमचो को जो चाहे कांग्रेस का दामन थामकर चमचई कर रहे हो या फिर भाजपा का दामन थामकर चमचई कर रहे हो, उन सबका इतिहास घर का भेदियों के रुप में भी दर्ज होगा। क्योंकि सच्चाई यह है कि गोर...

Rss प्रमुख मोहन भागवत के लिए रामराज आजादी है

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Rss प्रमुख मोहन भागवत के लिए रामराज आजादी है Rss प्रमुख मोहन भागवत के लिए रामराज आजादी है तो इस देश के शंभुक मुलनिवासियों के लिए रामराज गुलामी है जो की 1947 ई. में ही अपडेट गुलाम रामराज कायम हो गया है। क्योंकि इस देश की सत्ता विदेशी मुल के गोरे अंग्रेजो के  हाथो से जाने के बाद विदेशी मुल के मनुवादियों के हाथो वापस आ गया है। इस देश के साथ साथ अंबेडकर द्वारा लिखा गया भारत का संविधान भी मनुवादियों के कब्जे में है। बल्कि इस देश का हिंदू धर्म और हिंदू धर्म ग्रंथ भी मनुवादियों के कब्जे में है। मनुवादि हिंदू नही है बल्कि हिंदू नकाब लगाये हुए है। और न ही राम हिंदू भगवान है। बल्कि राम तो इस देश के मुलनिवासियो को गुलाम करने वाला वह मनुवादि राजा था जो की खुदको भगवान कहकर अपनी पूजा कराता था, जिसे अपना आदर्श और पूर्वज ये मनुवादि मानते हैं। जो मनुवादि इतने विकृत मांशिकता के हैं कि वे आजाद भारत का संविधान का भी शपथ लेकर इस देश में अपडेट गुलाम रामराज कायम किए हुए हैं। संविधा न क्या गुलाम करना और उच्च निच जाति भेदभाव करने के लिए बतलाया है? क्या जो कि खुदको जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य उच्च जाति ...