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निर्जिव पृथ्वी चाँद तारे भी जन्म लेकर अपना उम्र पुरा करके एकदिन मरते हैं , तो क्या उनकी भी आत्मा होती होगी ?

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निर्जिव पृथ्वी चाँद तारे भी जन्म लेकर अपना उम्र पुरा करके एकदिन मरते हैं , तो क्या उनकी भी आत्मा होती होगी ? प्रकृति की कृपा से जन्म लेकर इंसान मरने के बाद क्या वाकई में अपने शरिर को प्रकृति में छोड़कर आत्मा बनकर स्वर्ग नर्क जाता है ? या फिर निर्जिव ग्रह तारो की तरह इसी प्रकृति में ही बार बार अपना नया जन्म लेकर मौजुद रहता है ? स्वर्ग नर्क यदि इस प्रकृति दुनियाँ से बाहर है तो फिर वहाँ मौजुद लोग अपने बिना प्रकृति शरिर के उपर आत्मा द्वारा कैसे खाते पिते व प्यार करते होंगे ? मरने के बाद क्या अपने शरिर और आत्मा का मिलन फिर कभी नही होता है ? हलांकि प्रयोगिक और विज्ञान प्रमाणित मुल सच्चाई तो यही है कि प्रकृति में मौजुद निर्जिव पृथ्वी चाँद तारे और इंसान समेत बाकि जिव जंतु पेड़ पौधा सभी प्रकृति की कृपा से जन्म लेने के बाद मरकर प्रकृति में ही मौजुद रहते हैं | सिर्फ अपना नया रंग रुप बदलते रहते हैं , न कि प्रकृति से बाहर कथित दुसरी दुनियाँ में मौजुद स्वर्ग नर्क जाते हैं | और वैसे भी कथित प्रकृति से बाहर दुसरी दुनियाँ के बारे में बतलाने वाले इंसान भी खुद स्वीकारते हैं कि कथित उनकी जानका...

कथित स्वर्ग नर्क में इंसानो की अबादी कितनी है ?

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कथित स्वर्ग नर्क में इंसानो की अबादी कितनी है ? इस पृथ्वी में पहला इंसान जन्म से लेकर अबतक कितने मरे हुए इंसानी आत्माओ की अबादी कथित स्वर्ग नर्क में बसी होगी ? और स्वर्ग नर्क में जो अबादी तेजी से बड़ रही है , वह घटती है कि सिधे बड़ती जा रही है ? क्योंकि स्वर्गवासी होने वाले लोग यदि वाकई में इस प्रकृति दुनियाँ को छोड़कर कथित इस प्रकृति से बाहर किसी दुसरी दुनियाँ स्वर्ग का वासी होते जा रहे हैं , तो फिर अबतक जितने लोग स्वर्गवासी अथवा मर गए उन सबको जोड़कर जो अबादी स्वर्ग में होगी वह कितनी होगी ? जिस सवाल का जवाब किसी के पास नही है | पर मेरे पास इसका जवाब यही है कि स्वर्ग नर्क और कहीं नही बल्कि इसी प्रकृति में मौजुद है | सुख और खुशी का पल स्वर्ग है तो दुःख और गम का पल नर्क है | जिस स्वर्ग नर्क का यात्रा इसी प्रकृति में ही मौजुद है | पाप करने वालो को जीते जी इसी प्रकृति में सजा मिलती है | और जिन्हे उनके जिते जी सजा नही मिलती उनकी नई पिड़ी या फिर उनके सबसे अधिक करिबी को सजा मिलती है | और जहाँ तक स्वर्ग का मजा तो पुण्य करने वालो को उनके जिते जी विभिन्न रुपो में सुख और खुशी मिलती है...

गुलाम बनाने वाले मनुवादी के पूर्वजों की पूजा करने वाला मूलनिवासी फिल्म कोयला का गुंगा हिरो और मनुवादी प्रमुख बिलेन है

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 गुलाम बनाने वाले मनुवादी के पूर्वजों की पूजा करने वाला मूलनिवासी फिल्म कोयला का गुंगा हिरो और मनुवादी प्रमुख बिलेन है इस देश के मुलनिवासियों को गुलाम बनाकर उनके साथ छुवा छूत जैसे शोषण अत्याचार करने वाले मनुवादीयों के पुर्वज देव मूर्तियों की पूजा करने वाले मुलनिवासी दरसल फिल्म कोयला का वह गुंगा हिरो है , जो गुंगा बनाने वाले प्रमुख बिलेन की गुलामी तबतक करता है , जबतक की उसे यह सत्य मालुम नही हो जाता कि उसको गुंगा कौन बनाया है ? जबकि इस देश के मुलनिवासियों को बारह माह प्राकृति पर्व त्योहार मनाते और साक्षात प्राकृति की पुजा भगवान मानकर करते हुए साक्षात सत्य को जानकर भी अनजान बनकर साक्षात प्राकृति की पुजा करते समय बल्कि कभी भी मनुवादीयों के पुर्वज देवो की पुजा उन्हे भगवान मानकर नही करनी चाहिए थी , क्योंकि मनुवादीयों के पुर्वज देव जन्म लेकर मरने वाले इंसान ही थे , न की भगवान थे | तभी तो वे कथित धार्मिक धारावाहिको और फिल्मो में भी इंसानो की तरह इंसानो से संभोग करके अपना वंश बड़ाते दिखते हैं , और इंसानो की तरह धरती में विचरण करते रहते हैं | जैसे की देवो का राजा इंद्र...

यूरेशिया से आए हुए मनुवादी जिन्हे देव भी कहा जाता है ,वे कोई हिंदु भगवान नही हैं

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यूरेशिया से आए हुए मनुवादी  जिन्हे देव भी कहा जाता है  वे कोई हिंदु भगवान नही हैं  यानी अब उत्तर प्रदेश में होली ,दिवाली रक्षाबंधन , मकर संक्रांती वगैरा पर्व त्योहार मनाते हुए कोई नही दिखेगा ? झुठ की भी हद होती है | हिंदु धर्म विश्व में तीसरा सबसे बड़ा धर्म है ,जो मनुवादीयों की मुठीभर अबादी से तीसरा बड़ा धर्म नही है | बल्कि इस देश का घर जमाई मनुवादी को परिवार का ज्ञान प्रदान करने वाली बहुजन डीएनए की ही नारी की वजह से मनुवादी हिंदु कहलाता है | मनुवादी तो असल में बारह माह प्रकृतिक पर्व त्योहार मनाने वाला हिंदु है ही नही ! बल्कि वह तो इस कृषि प्रधान देश में प्रवेश से पहले परिवार समाज के बारे में भी नही जानता था | उसे हिंदू धर्म की इतनी समझ घर जमाई बनने के बाद हुआ है | लेकिन भी न जाने कबसे बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करने के लिये क्या क्या ब्रेनवाश करने की कोशिष नही की जा रही है ! चीन में मौजुद धर्म की अबादी बौद्ध धर्म से भी ज्यादे है ,पर बार बार ये कहा जाता है जैसे चीन में सबसे बड़ा धर्म बौद्ध धर्म है | एक बात निश्चित है कि हिंदु धर्म को कमजोर और बेका...

1947 ई० से लेकर अबतक दो तीन को छोड़ दिया जाय तो सारे प्रधामंत्री और राष्ट्रपति बल्कि जजो का प्रमुख भी विदेशी DNA के लोग बनते आए हैं

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1947 ई० से लेकर अबतक दो तीन को छोड़ दिया जाय तो सारे प्रधामंत्री और राष्ट्रपति बल्कि जजो का प्रमुख भी विदेशी DNA के लोग बनते आए हैं  विडंबना है कि इस देश में बहुसंख्यक अबादी इस देश के मुलनिवासियों की होते हुए भी अल्पसंख्यक विदेशी मुल का शासन चल रहा है | जो लोग छल कपट और घर के भेदियो की सहायता से लोकतंत्र के चारो स्तंभो में कब्जा करके अल्पसंख्यक होने के बावजुद भी राज कर रहे हैं | जैसे की कभी गोरे अल्पसंख्यक होते हुए भी इस देश में राज कर रहे थे | उसी तरह विदेशी DNA मुल के लोगो द्वारा आज भी मंत्री और उच्च अधिकारी पदो में कब्जा करके राज किया जा रहा है | दरसल मैं बात कर रहा हूँ यूरेशिया से आए उन मनुवादीयों का जिनके पुर्वज हजारो साल पहले इस देश में आकर इस देश की महिलाओं के साथ परिवार बसाकर घर जमाई बनकर अपने पुर्वजो की धरती जहाँ से वे इस कृषि प्रधान देश में आए हैं , उसे मानो भुलाकर या फिर अपने पुर्वजो की धरती को भी पहचानने से इंकार करके दुसरो के उपर नजरे गड़ाकर दुसरो के हक अधिकार को लुटकर राज करने के लिए यहीं पर बस गए हैं | हो सकता है सायद उनका कोई अपना शासन व्यवस्था और अपना प...

राम मंदिर में किनके पुर्वजो की पूजा होगी जिन्हे शुद्र कहा गया है उनके पुर्वजो की या फिर जिन्हे ब्रह्मण , क्षत्रिय , वैश्य कहा गया है उनके पुर्वजो की ?

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राम मंदिर में किनके पुर्वजो की पूजा होगी जिन्हे शुद्र कहा गया है उनके पुर्वजो की या फिर जिन्हे ब्रह्मण , क्षत्रिय , वैश्य कहा गया है उनके पुर्वजो की ? पुरी दुनियाँ जानती है कि राम इस देश के मुलनिवासियों के पुर्वज नही है | फिर भी आखिर इस देश के मुलनिवासियों जिन्हे देव को अपना पुर्वज मानने वालो ने शुद्र निच घोषित करके हजारो सालो से छुवा छुत भेदभाव शोषण अत्याचार किया हैं , क्यों उन्हे भी राम से जोड़ा जाता है ? जबकि राम ने भी अपने रामराज में जिन्हे शुद्र निच कहा गया है , उस शंभुक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दिया था , क्योंकि शंभुक ने शुद्र के लिये वेद ज्ञान मना रहने के बावजुद भी वेद ज्ञान ले लिया था | आखिर ये मनुवादी अपनी बेशर्मी त्यागकर कब इस बात पर शर्म करेंगे कि जिनके साथ वे भेदभाव शोषण अत्याचार हजारो सालो से करते आ रहे हैं , उन्हे भी अब अपनी स्वार्थपूर्ति के लिये जिन्हे वे शुद्र निच मानते हैं , उन्हे देव पुजक बताकर भी आजतक बेशर्म होकर भेदभाव शोषण अत्याचार क्यों करते रहते हैं | जिसे समझनी हो तो कोई भी अपने मन में एक सवाल करके पता कर सकता है कि मनुवादी जिस तरह खुदको देवो का ...

गंदी राजनीति का दौर चरम स्थिति में है,चुनाव के लिए किसी भी बड़ी खुनी घटना या चर्चित व्यक्ती को बलि का बकरा बनाया जा सकता है

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गंदी राजनीति का दौर चरम स्थिति में है,चुनाव के लिए किसी भी बड़ी खुनी घटना या चर्चित व्यक्ती को बलि का बकरा बनाया जा सकता है लेकिन जनता मालिक की सुरक्षा के लिए तैनात सेवक चाहे खुदकी जितनी सुरक्षा में ज्यादे ध्यान देकर गरिब कमजोर नागरिक को मरने दें ,एकदिन उसकी भी मौत की खबर जरुर आयेगी , चाहे पूर्व प्रधानमंत्री ,मंत्री ,राष्ट्रपति की हुई मौत या फिर सेवाकाल में ही इनकी मौत की खबर आयेगी , आयेगी तो जरुर! तब इनकी सेवा से अपनी जिवन में दर्द झेल रहे नागरिक सड़को में फुलो से सजी लाशो को देखकर शोक नही मनायेंगे , बल्कि भितर से जस्न मनायेंगे ! हाँ जिनको इनसे लाभ हो रहा है और इनकी सेवा से अपने आप को सुरक्षित महसुश कर रहे हैं , वे आँशु जरुर बहायेंगे और अच्छे प्रधानमंत्री अच्छे राष्ट्रपति अच्छे मंत्री के रुप में इन्हे जिते जी हमेशा याद जरुर करेंगे ! ये भविष्य में होनेवाली ऐतिहासिक बाते सभी उन सेवको पर लागु होती है जिन्हे नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेवारी देकर उनपर अच्छी खाशी धन खर्च की जा रही है | क्योंकि गरिबी भुखमरी से मर रहे नागरिक उनकी मुफ्तखोरी के लिए उनसे अपनी जिवन सुरक्षा की उम्मीद लग...